22 Jun 2021, 00:38:07 के समाचार About us Android App Advertisement Contact us app facebook twitter android
news

किस तरह के मरीजों को ब्लैंक फंगस का खतरा ज्‍यादा है, AIIMS डायरेक्टर ने बताया

By Dabangdunia News Service | Publish Date: May 15 2021 8:36PM | Updated Date: May 15 2021 8:36PM
  • facebook
  • twitter
  • googleplus
  • linkedin

नई दिल्‍ली। देश में कोरोना वायरस के साथ-साथ अब ब्लैक फंगस (म्यूकोर्मिकोसिस) के केस भी बढ़ने लगे हैं। लोगों की जान का दुश्मन बन रही इस बीमारी का नाम म्यूकोरमाइसिस है, जिसे ब्लैक फंगस की कहा जा रहा है। यह बीमारी देश में लगातार पैर फैला रही है। कोरोना मरीजों में फंगल इन्फेक्शन, जिसे 'ब्लैक फंगल इन्फेक्शन' कहा जा रहा है, के मामले बढ़ रहे हैं। इस इंफेक्शन से सबसे बड़ा डर ये है कि ये तेजी फैलता है और लोगों के आंखों की रोशनी चली जाती है या कुछ अंग काम करना बंद कर देते हैं। कई राज्यों में ऐसे मरीज मिले हैं जिनमें यह फंगल इंफेक्शन पाया गया है। ब्लैक फंगस केस के बढ़ने के पीछे कोरोना वायरस तो है ही साथ में स्टेरॉयड को भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। शनिवार को एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा कि डायबिटीज, कोरोना पॉजिटिव और स्टेरॉयड लेने वाले रोगियों में फंगल इंफेक्शन की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में हमें हमें स्टेरॉयड का दुरुपयोग रोकना चाहिए। 
 
गुलेरिया ने कहा कि यह रोग में चेहरे, नाक, आंख या फिर मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है। फेफड़ों में भी फैल सकता है और आंखों की रोशनी भी जा सकता है। गुलेरिया ने कहा कि इस इंफेक्शन को रोकने के लिए हमें प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। यह देखा गया है कि यह एक सेकेंडरी इंफेक्शन हैं फंगल और बैक्टेरियल है जो मौत का कारण बन रहे हैं। वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि देश में कोविड-19 के कुल मामलों में से 85 प्रतिशत मामले 10 राज्यों से हैं। मंत्रालय ने कहा कि 11 राज्यों में संक्रमण के एक-एक लाख से अधिक उपचाराधीन मामले हैं, जबकि आठ राज्यों में 50 हजार से एक लाख के बीच उपचाराधीन रोगी हैं। इसने बताया कि 24 राज्यों में संक्रमण दर 15 प्रतिशत से अधिक है।
  • facebook
  • twitter
  • googleplus
  • linkedin

More News »