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5वें दौर की बातचीत, किसानों ने ठुकराया सरकार का प्रस्ताव, लिखित में मांगा जवाब

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Dec 5 2020 5:17PM | Updated Date: Dec 5 2020 5:20PM
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नई दिल्ली। देश में नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन का आज 10वां दिन है। दस दिन से दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसान केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई के लिए कमर कस चुके हैं। कानूनों पर बीच का रास्ता निकालने के लिए किसानों और सरकार के बीच शनिवार को 5वें दौर बैठक शुरू हो गई है। दिल्ली के विज्ञान भवन में चल रही इस बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और किसान नेता शामिल हुए हैं।
 
इस बैठक में किसान संगठनों के 40 प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। बैठक में सरकार ने कानून रद्द करने के अलावा कोई और रास्ता निकालने और संशोधन की बात रखी थी, लेकिन किसान नेता कृषि कानून रद्द कराने पर अड़े हैं और उन्होंने सरकार द्वारा दिए गए संशोधन के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, जिसे लेकर सरकार और किसान नेताओं के बीच टकराव की स्थिति है। किसान संगठनों ने बैठक में कहा कि हम सरकार से चर्चा नहीं, लिखित में ठोस जवाब चाहते हैं, अब तक बहुत चर्चा हो चुकी है। सरकार और किसान नेताओं की बैठक में 15 मिनट का टी ब्रेक हो गया है।  
 
सुबह हुई थी हाईलेवल बैठक
वहीं भारतीय परिवहन संघ ने 8 दिसंबर से किसानों के समर्थन में हड़ताल करने का ऐलान कर दिया है। गौरतलब है कि मीटिंस से पहले, किसानों के मुद्दे पर शनिवार सुबह गृह मंत्री अमित शाह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने पहुंचे थे। किसान संगठनों के साथ पांचवें की दौर की बैठक से पहले ये बड़ी मीटिंग हुई थी। इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी मौजूद थे। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भी मीटिंग में शामिल होने पहुंचे। इसके बाद पीएम मोदी और अमित शाह की फिर बैठक हुई थी।
 
वहीं केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मीटिंग से पहले उम्मीद जताई थी कि किसान सकारात्मक सोचेंगे और अपना आंदोलन समाप्त करेंगे। केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि केंद्र के साथ आज की बैठक में किसानों की शंकाओं को दूर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हाल में हुई बैठकों में, कुछ मुद्दों को स्पष्ट किया गया था। यह विपक्ष की राजनीति है, वे विरोध-प्रदर्शन को और भड़का रहे हैं। बैठक फलदायी होगी और हमें उम्मीद है कि किसान विरोध वापस लेंगे।

 

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