21 Sep 2021, 23:31:27 के समाचार About us Android App Advertisement Contact us app facebook twitter android
news » World

यूरोप, मध्य एशिया, दक्षिण एशिया को कनेक्ट करेगा चाबहार बंदरगाह : जयशंकर

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Jul 16 2021 4:48PM | Updated Date: Jul 16 2021 4:48PM
  • facebook
  • twitter
  • googleplus
  • linkedin

ताशकंद। भारत ने ईरान के चाबहार बंदरगाह को यूरोप, दक्षिण एशिया एवं मध्य एशिया के बीच कनेक्टिविटी एवं समृद्धि का एक बड़ा संभावित केन्द्र बताते हुए आज प्रस्ताव किया कि वह इसे एक आर्थिक रूप से लाभकारी, पारदर्शी एवं सबकी भागीदारी वाले विकल्प के रूप में विकसित करने तथा इसमें निवेश करने के लिए तैयार है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उज्बेकिस्तान सरकार द्वारा आयोजित कनेक्टिविटी पर एक उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘‘मध्य एवं दक्षिण एशिया : कनेक्टिविटी’’ को संबोधित करते हुए यह बात कही।
 
इस मौके पर विदेश मंत्री अब्दुलाजीज कामीलोव भी मौजूद थे। डॉ. जयशंकर ने कहा कि मध्य एवं दक्षिण एशिया के बीच ऐतिहासिक काल से ही बहुत ही प्रभावी कनेक्टिविटी रही है जो औपनिवेशक काल खंड में कमजोर हो गयी। भारत ने बीते कुछ वर्षों से इन संपर्कों को पुन: बनाने का बीड़ा उठाया है। हमने भारतीय उपमहाद्वीप और पूर्वी दिशा में प्रगति की है। हमारे लिए व्लाडीवोस्तक से खाड़ी एवं पूर्वी अफ्रीका तक संपर्क को बहाल करना महत्वपूर्ण है।
 
हालांकि मध्य एशिया और यूरेशिया की ओर चुनौती का समाधान अभी होना बाकी है। विदेश मंत्री ने कहा कि 2016 से भारत ने ईरान में चाबहार बंदरगाह को संचालित करने के लिए व्यावहारिक कदम उठाये। इससे मध्य एशियाई देशों के लिए समुद्र तक एक सुरक्षित, आर्थिक रूप से व्यावहारिक एवं निर्बाध पहुंच सुनिश्चित हुई है। इसकी दक्षता अब स्पष्ट रूप से साबित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि हमने ईरान से रूस तक उत्तर दक्षिण अंतरराष्ट्रीय परिवहन गलियारे के फ्रेमवर्क में चाबहार बंदरगाह को जोड़ने का प्रस्ताव किया है। चाबहार बंदरगाह के संयुक्त इस्तेमाल के लिए भारत उज्Þबेकिस्तान ईरान अफगानिस्तान चतुष्कोणीय कार्यसमूह का गठन एक स्वागत योग्य पहल है।
 
डॉ. जयशंकर ने कहा कि दुनिया भर में आर्थिक प्रगति मुख्यत: तीन कारकों - कनेक्टिविटी, कॉमर्स एवं कॉन्टेक्टस, पर निर्भर करती है। क्षेत्रीय सहयोग एवं समृद्धि को सुनिश्चित करने के लिए ये तीनों का एक साथ होना अनिवार्य है। लेकिन राजनीति, निहित स्वार्थ एवं अस्थिरता इसके क्रियान्वयन की राह में बड़े रोड़े हैं। हमें अपने अनुभवों से सीखना होगा। कनेक्टिविटी को बाधित करने की आदत से किसी को लाभ नहीं होता है। कारोबारी अधिकारों पर एकतरफा दृष्टि और अधिकार कभी कामयाब नहीं हो सकते।
 
उन्होंने कहा कि कनेक्टिविटी कोविड पश्चात परिदृश्य में अधिक महत्वपूर्ण हो गयी है क्योंकि अधिक टिकाऊ एवं भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला दुनिया की जरूरत बन गयी है जहां केवल उत्पादन ही नहीं बल्कि लॉजिस्टिक भी महत्वपूर्ण हो गयी है। उन्होंने सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास एवं समृद्धि के लिए शांति एवं सुरक्षा भी जरूरी है। अफगानिस्तान से होकर एक सुरक्षित एवं भरोसेमंद कनेक्टिविटी के लिए विश्व को उसकी शासन व्यवस्था में भरोसा होना चाहिए। हमारी कनेक्टिविटी के विमर्श के बुनियादी तत्वों में दक्षता, विश्वसनीयता और नियमों का अनुपालन प्रमुख है।
 
डॉ. जयशंकर ने कहा कि मध्य एशिया एवं दक्षिण एशिया के बीच कनेक्टिविटी के विस्तार के लिए आधारभूत ढांचे के अलावा लोगों का जुड़ाव भी जरूरी होता है। पर्यटन एवं सामाजिक संपर्क भी एक अनुकूल वातावरण का निर्माण करते हैं। इसके लिए परस्पर विश्वास तथा अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन जरूरी है। संप्रभुता एवं प्रादेशिक अखंडता का सम्मान अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रमुख बुनियादी सिद्धांत होते हैं। उन्होंने कहा कि कनेक्टिविटी आर्थिक व्यवहार्यता एवं वित्तीय दायित्व पर आधारित होनी चाहिए और इसे एक आर्थिक गतिविधि के रूप में बढ़ाया जाना चाहिए, ना कि ऋण के बोझ के रूप में। यह पारदर्शी तथा परामर्श एवं भागीदारी पर आधारित होनी चाहिए। इस सपने को साकार करने के लिए भारत सहयोग करने, योजना बनाने, निवेश करने एवं निर्माण करने के लिए तैयार है।  
 
  • facebook
  • twitter
  • googleplus
  • linkedin

More News »