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अर्ली, अग्रेसिव, ट्रेस, टेस्ट और ट्रीट से कम हुए कोरोना केस : योगी

By Dabangdunia News Service | Publish Date: May 11 2021 12:16AM | Updated Date: May 11 2021 12:16AM
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गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में प्रदेश में वृहद स्तर पर चलाए गए अर्ली, अग्रेसिव, ट्रेस, टेस्ट और ट्रीट अभियान के व्यापक परिणाम सामने आए हैं। पिछले 10 दिनों में राज्य में कोरोना के एक्टिव केस में 85,000 से अधिक की कमी आई है। कोरोना के फर्स्ट वेव में उत्तर प्रदेश ने बेहतर मुकाबला किया था, सेकंड वेव में भी उसी प्रबंधन के साथ काम किया जा रहा है।

योगी सोमवार को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कोविड नियंत्रण को लेकर गोरखपुर-बस्ती मंडल की समीक्षा बैठक करने के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कोरोना के सेकंड वेव के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में पूरे देश में बड़ी मजबूती से अभियान चल रहा है। देश में सबसे अधिक आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश भी कोरोना से पूरी मजबूती से लड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि बड़े बड़े विशेषज्ञ यह आशंका जता रहे थे कि उत्तर प्रदेश में पांच से 10 मई के बीच प्रतिदिन एक लाख कोरोना केस आएंगे, लेकिन अर्ली, अग्रेसिव ट्रेस, टेस्ट और ट्रीट अभियान का परिणाम रहा कि आशंका के विपरीत आज 21 हजार एक्टिव केस हैं, कल यह संख्या 23 हजार थी। एक्टिव केस की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है।

योगी ने बताया कि कोरोना के फर्स्ट वेव में अधिकतम एक्टिव केस की संख्या 68 हजार और एक दिन में मिले केस की अधिकतम संख्या 7500 थी, जबकि सेकंड वेव में 30 अप्रैल को अधिकतम एक्टिव केस की संख्या 3.10 लाख और एक दिन के अधिकतम केस की संख्या 24 अप्रैल को 38055 थी। स्पष्ट है कि सेकंड वेव में संक्रमण का फैलाव कई गुना ज्यादा था। इस रफ्तार के चलते ऑक्सीजन की मांग भी तेजी से बढ़ी।

कोरोना के फर्स्ट वेव में ऑक्सीजन की डिमांड पूरी करने को मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट ही पर्याप्त थे, सेकंड वेव में अचानक मांग बढ़ गई। उन्होंने पीएम मोदी को इस बात के लिए धन्यवाद दिया कि उनके मार्गदर्शन में ऑक्सीजन की मांग को पूरी करने के लिए देश में पहली बार वायुसेना के विमानों और ऑक्सीजन एक्सप्रेस की मदद से ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई। फर्स्ट वेव में 350 मीट्रिक टन तक लिक्विड मेडिकल ऑक्सिजन की जरूरत पड़ी थी, लेकिन कल उत्तर प्रदेश में एक हजार मीट्रिक टन की आपूर्ति की गई।

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