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Sport

Olympic Gold Medalist नीरज चोपड़ा ने रैंकिंग में लगाई स्वर्णिम छलांग, दुनिया के नंबर-2 खिलाड़ी बनें

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Aug 12 2021 5:28PM | Updated Date: Aug 12 2021 5:28PM
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नई दिल्ली। विश्व एथलेटिक्स ने भाला फेंक पुरुष एथलीटों की ताजा रैंकिंग जारी की है। वर्ल्ड एथलेटिक्स द्वारा जारी की गई इस रैंकिंग में भारत के जेवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने के बाद नीरज ने 14 एथलीटों को पीछे छोड़ते हुए दूसरा मुकाम हासिल किया है। खेलों के महाकुंभ टोक्यो ओलंपिक में भाग लेने से पहले नीरज की रैंकिंग 16 थी। ओलंपिक में भाला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने के बाद नीरज ने रैंकिंग के मामले में दुनिया के कई दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है। 
 
नीरज चोपड़ा टोक्यो ओलंपिक में पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता। वह ट्रैक और फील्ड स्पर्धा में भारत की तरफ से ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले एथलीट हैं। उन्होंने 87.58 मीटर का थ्रो कर यह स्वर्णिम उपलब्धि हासिल की। 
 
वहीं अगर रैंकिंग की बात की जाए तो नीरज विश्व एथलेटिक्स रैंकिंग में 1315 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर काबिज हैं। उनसे आगे सिर्फ जर्मनी के जोहांस वेटर हैं जिनके 1396 अंक हैं और वह पहले स्थान पर हैं। वेटर साल 2021 में सात बार 90 से अधिक मीटर दूर भाला फेंक चुके हैं। 
 
हालांकि टोक्यो ओलंपिक में जोहांस वेटर भारत के नीरज चोपड़ा के आगे टिक नहीं पाए। इस दौरान वह एक बार भी 90 मीटर दूरी तक भाला नहीं फेंक सके। जर्मनी के इस खिलाड़ी को भाला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक का दावेदार माना जा रहा था। लेकिन वह अपने बेस्ट थ्रो 82.52  के साथ नौवें स्थान पर रहे और ओलंपिक फाइनल से बाहर हो गए।
 
विश्व एथलेक्टिस रैंकिंग में पोलैंड के मार्सिन क्रुकोव्सकी 1302 अंको के साथ तीसरे नंबर पर हैं। जबकि टोक्यो ओलंपिक में भाला फेंक स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले याकूब वडलेज्चो के 1298 अंक हैं और वह चौथे स्थान पर काबिज हैं। वहीं, जर्मनी के जुलियन वेबर 1291 अंकों के साथ पांचवीं पायदान पर हैं। 
 
टोक्यो ओलंपिक के दौरान नीरज चोपड़ा ने कहा था कि उन्होंने कभी प्रतिष्ठा और रैंकिंग में विश्वास नहीं किया, उनकी स्पष्ट सोच और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन ने उन्हें टोक्यो ओलंपिक में पदक जीतने के लिए मदद की। नीरज ने यह भी कहा था कि ईमानदारी से कहूं तो मैंने गोल्ड मेडल के बारे में नहीं सोचा था, जब आप ओलंपिक पहुंच जाते हैं तो वर्ल्ड रैंकिंग कोई मायने नहीं रखती
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