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बच्चों को लिए कोराना वैक्सीन कुछ ही दिन में संभव स्वास्थ्य मंत्री की PM के साथ बैठक

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Jul 27 2021 2:37PM | Updated Date: Jul 27 2021 2:37PM
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नई दिल्ली। देश में  कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर के संकोच के बीच बच्चों के लिए कोरोना Vaccine अगस्त तक आ सकती है। पहली बार सरकार की ओर से  ऐसे संकेत दिए गए हैं। खबरों के मुताबिक, स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने बीजेपी सांसदों को यह बताया है। बीजेपी संसदीय दल (BJP Parliamentarian Meeting) की बैठक में उन्होंने यह जानकारी दी है। इससे पहले बच्चों के लिए कोरोना वैक्सीन सितंबर तक आने की संभावना जताई जा रही थी। एम्स प्रमुख डॉ। रणदीप गुलेरिया ने पिछले हफ्ते कहा था कि सितंबर तक बच्चों के लिए कोविड-19 वैक्सीन (Children Corona Vaccination) के इस्तेमाल की मंजूरी दी जा सकती है। देश में जाइडस कैडिला (Zydus Cadila) की बच्चों के लिए वैक्सीन के ट्रायल अंतिम चरण में है।
 
Bharat Biotech भी बच्चों के लिए कोरोना Vaccine तैयार करने में जुटी है। वो भी तीसरे चरण के परीक्षण करने में जुटी है। अगर ट्रायल के नतीजे सफल रहे हैं तो बच्चों की कोरोना Vaccine को जल्द मंजूरी मिलने की बाद उन्होंने कही थी। बच्चों के लिए कोविड-19 की Vaccine के ट्रायल पटना और दिल्ली एम्स में भी हुए हैं। Bharat Biotech की स्वदेशी Vaccine  कोवैक्सीन पहले ही देश भर में आपातकालीन मंजूरी के तहत वयस्कों को दी जा रही है। सीरम इंस्टीट्यूट भी बच्चों के लिए अपनी Vaccine कोवावैक्स के परीक्षण की तैयारियों में जुटा है।
 
दुनिया में अमेरिकी कंपनी फाइजर की कोरोना वैक्सीन बच्चों को लगाई जा रही है। हालांकि इस कंपनी ने भारत में प्रवेश को लेकर कई शर्तें रखी हैं, जिसमें वैक्सीनेशन को लेकर किसी भी कानूनी कार्रवाई से छूट की शर्त शामिल है। वहीं यूरोपीय संघ की स्वास्थ्य नियामक एजेंसी ने 12 से 17 साल के बच्चों के लिए मॉडर्ना की वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी कहना है कि बच्चों को स्कूल भेजने और तीसरी लहर से सुरक्षित करने के लिए वैक्सीनेशन बेहद जरूरी है। कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों पर ज्यादा असर पड़ने की आशंका भी जताई जाती रही है। दिल्ली समेत कई राज्य सरकारों ने भी स्कूलों को खोलने के लिए बच्चों के टीकाकरण को बेहद जरूरी बताया है। कई राज्यों ने बड़ी कक्षाओं के स्कूल तो खोलने का ऐलान कर दिया है, लेकिन आठवीं कक्षा तक के स्कूलों को खोलने का जोखिम अभी ज्यादातर राज्यों ने नहीं मोल लिया है। 
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