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Sport

इटली बना यूरो चैंपियन, पेनल्टी शूटआउट में इंगलैंड को हराया

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Jul 12 2021 5:23PM | Updated Date: Jul 12 2021 5:24PM
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लंदन। इटली की फुटबॉल में सुखद वापसी हो गयी लेकिन इंगलैंड का किसी बड़े खिताब का पिछले 5 दशकों से भी अधिक समय से चला आ रहा पीड़ादायक इंतजार बदस्तूर जारी रहा। और यह केवल एक पेनल्टी शूटआउट के कारण हुआ। इटली ने रविवार की रात को खेले गये फाइनल में इंगलैंड को पेनल्टी शूटआउट में 3-2 से हराकर यूरोपीय फुटबॉल चैंपियनशिप– यूरो 2020 का खिताब जीता। दोनों टीमें नियमित और अतिरिक्त समय तक 1-1 से बराबरी पर थी। यह दूसरा अवसर है जबकि इटली यूरो चैंपियन बना। जियानलुगी डोनारुम्मा ने अपनी बायीं तरफ डाइव लगाकर बुकायो साका का शॉट रोका और इस तरह से इंगलैंड को अपने पसंदीदा वेम्बले स्टेडियम में लगातार तीसरी बार पेनल्टी शूटआउट में नाकामी हाथ लगी। अभी 4 साल पहले ही इटली की फुटबॉल की स्थिति अच्छी नहीं थी।
 
वह 6 दशक में पहली बार विश्वकप में जगह बनाने में असफल रहा था। अब वह यूरोप की सर्वश्रेष्ठ टीम है और कोच राबर्टों मनीची के रहते हुए सर्वाधिक मैचों में अजेय रहने के राष्ट्रीय रिकार्ड की राह पर है। इंगलैंड पिछले 55 वर्षों में पहली बार किसी बड़े टूर्नामेंट का फाइनल खेल रहा था। उसने 1966 में विश्वकप में जीत के बाद कोई बड़ा खिताब नहीं जीता है। इससे पहले उसने 1990, 1996, 1998, 2004, 2006 और 2012 में बड़े टूर्नामेंटों में पेनल्टी शूटआउट में मैच गंवाये थे। इंगलैंड ने ल्यूक शॉ के दूसरे मिनट में किये गये गोल से बढ़त बना ली थी। यह यूरोपीय चैंपियनशिप के फाइनल में सबसे तेज गोल था। इटली के लियोनार्डो बोनुची ने 67वें मिनट में बराबरी का गोल किया। लंदन के रहने वाले 19 वर्षीय साका को पेनल्टी में उनकी चूक के बाद इंगलैंड के कई खिलाड़ियों ने गले लगाया।
 
इंगलैंड के कोच गेरेथ साउथगेट इससे पिछली पेनल्टी चूकने वाले जादोन सांचो के गले लगे जबकि पेनल्टी में नाकाम रहे एक अन्य खिलाड़ी मार्कस रशफोर्ड निराश होकर मैदान से बाहर चले गये। सांचो और रशफोर्ड को अतिरिक्त समय के अंतिम क्षणों में स्थानापन्न के रूप में लाया गया था। ऐसा लगता है कि पेनल्टी लेने की उनकी विशेषज्ञता के कारण यह फैसला किया गया था। निर्णायक पेनल्टी रोकने के बाद डोनारुम्मा के आंसू नहीं थम रहे थे। उनके साथी उनकी तरफ दौड़ पड़े और उन्हें अपने गले लगा दिया। इटली के प्रशंसक मदहोश थे और खिलाड़ी जोश में। इटली ने इससे पहले 1968 में यूरोपीय चैंपियनशिप जीती थी। यूरोपीय चैंपियनशिप के पिछले 6 में से 3 फाइनल की तरह यह मैच भी अतिरिक्त समय तक खिंच गया।
 
यह अप्रत्याशित नहीं था क्योंकि दोनों सेमीफाइनल भी अतिरिक्त समय तक खिंचे थे और उन मैचों में भी इन दोनों टीमों ने अपनी रक्षात्मक क्षमता का अच्छा नमूना पेश किया था। असल में इटली की मजबूत रक्षापंक्ति में केवल एक बार सेंध लगायी गयी और वह भी तब जब शॉ ने कीरन ट्रिपियर के क्रास पर गोल किया। यह शॉ का इंग्लैंड की तरफ से पहला गोल था। विशिष्ट अतिथियों के बॉक्स में बैठे डेविड बैकहम और टॉम क्रूज ने भी अन्य दर्शकों की तरह इस गोल का जश्न मनाया। इसके बाद इटली के मध्यपंक्ति के खिलाड़ियों ने दबदबा बनाया। उनकी पासिंग लाजवाब थी। इंगलैंड का रक्षण भी मजबूत था, लेकिन दूसरे हाफ में इटली उसमें सेंध लगाने में सफल रहा। दायें छोर से एक विंगर ने पोस्ट के करीब गेंद पहुंचायी और बोनुची गोल करने में सफल रहे। इंग्लैंड ने इसके बाद अच्छा खेल दिखाया लेकिन वह मैच को पेनल्टी शूट आउट में खिंचने से नहीं रोक पाया।
 
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