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देश के कोने-कोने तक आसानी से वैक्सीन पहुंचाने में जुटी सरकार

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Nov 29 2020 12:36AM | Updated Date: Dec 1 2020 8:48PM
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नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस वैक्सीन बनाने का काम जोर-शोर से जारी है। केंद्र सरकार हर भारतीयों को वैक्सीन देने की रणनीति पर काम कर रही है। वैक्सीन के स्टोरेज, उसके लिए जरूरी कोल्ड चेन समेत हर छोटी-बड़ी चीज पर सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय की नजर है। पीएम नरेंद्र मोदी शनिवार को देश में बन रहीं 3 प्रमुख कोरोना वैक्सीनों के विकास की समीक्षा की। इस बीच वह वैक्सीन ट्रांसपोर्ट के लिए लग्जमबर्ग की एक कंपनी के साथ करार पर भी विचार कर रहे हैं। कंपनी अपने विशेषज्ञों की टीम भी भारत भेज रही है।
 
लक्जमबर्ग की कंपनी के साथ भारत करने वाला है करार, लक्जमबर्ग के PM ने दिया था प्रस्ताव
 
रिपोर्ट के मुताबिक लक्जमबर्ग के प्रधानमंत्री ने वैक्सीन ट्रांसपोर्टेशन प्लांट लगाने का प्रस्ताव दिया है जिस पर पीएम मोदी गंभीरता से विचार कर रहे हैं। बेटल ने 19 नवंबर को पीएम मोदी के साथ लक्जमबर्ग के पहले द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के दौरान यह प्रस्ताव दिया था। इस दिशा में काफी प्रगति के भी संकेत हैं। प्रस्ताव के मुताबिक, गुजरात में रेफ्रिजरेटेड वैक्सीन ट्रांसपोर्टेशन प्लांट लगना है। इससे देश के कोने-कोने में, सुदूर गांवों तक वैक्सीन पहुंचाने को सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
 
पीएम ने वैज्ञानिकों से की वैक्सीन को लेकर चर्चा
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस के टीके के विकास कार्य की समीक्षा के लिए शनिवार को अहमदाबाद, हैदराबाद और पुणे का दौरा किया और वैज्ञानिकों से चर्चा की। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने कहा कि दिन भर के दौरे का उद्देश्य नागरिकों के टीकाकरण में भारत के प्रयासों में आने वाली चुनौतियों, तैयारियों और रोडमैप जैसे पहलुओं की जानकारी हासिल करना था। मोदी ने अपने दौरे की शुरुआत अहमदाबाद के नजदीक दवा कंपनी जाइडस कैडिला के संयंत्र के दौरे के साथ की। उसके बाद वह हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक के संयंत्र पहुंचे और आखिर में पुणे स्थित सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया का दौरा किया।
 
गुजरात में स्थापित होगा प्लांट 
 
रिपोर्ट में आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि लक्जमबर्ग की कंपनी बी. मेडिकल सिस्टम अगले हफ्ते एक हाई-लेवल टीम को गुजरात भेज रही है। यह टीम वहां वैक्सीन कोल्ड चेन स्थापित करेगी, जिसमें सौर ऊर्जा से चलने वाले रेफ्रिजरेटर, फ्रीजर और वे बॉक्स भी शामिल होंगे जिनमें रखकर वैक्सीन को एक जगह से दूसरे जगह भेजा जाएगा। वैसे तो प्लांट को पूरी तरह तैयार होने में करीब 2 साल लगेंगे।
4 से -20 डिग्री तापमान के साथ भेजी जा सकेगी वैक्सीन 
 
ये रेफ्रिजरेटेड ट्रांसपोर्ट बॉक्स -4 डिग्री सेल्सियस से -20 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ वैक्सीन को डिलिवर करने में सक्षम होंगे। वैसे लक्जमबर्ग की इस कंपनी के पास माइनस 80 डिग्री सेल्सियस तापमान पर वैक्सीन को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने की तकनीक भी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर व्यक्तिगत रूप से लक्जमबर्ग के प्रस्ताव की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। करार को अंतिम रूप देने के लिए यूरोपीय यूनियन में भारत के राजदूत संतोष झा ने 20 नवंबर को कंपनी के सीईओ और डेप्युटी सीईओ से भी बातचीत कर चुके हैं।
 
कहां तक पहुंची वैक्सीन?
 
देश में फिलहाल तीन वैक्सीन पर काम चल रहा है। इनमें ऑक्सफोर्ड वैक्सीन, भारत बायोटेक की वैक्सीन और जायडस कैडिला की वैक्सीन शामिल है। यह तीनों वैक्सीन ट्रायल के अलग-अलग चरण में हैं। देश में सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की ऑक्सफोर्ड वैक्सीन, कोविशील्ड रेस में सबसे आगे है। सीरम इंस्टीट्यूट की योजना ये है कि ब्रिटेन में ऑक्सफोर्ड वैक्सीन को आपातकालीन मंजूरी मिलते ही भारत में वह इसके इमरजेंसी अप्रूवल के लिए अप्लाई कर देगी। दूसरी वैक्सीन जायडस कैडिला की जायकोव-डी है। यह वैक्सीन अपने दूसरे चरण के ट्रायल में है। भारत बॉयोटेक की वैक्सीन कोवैक्सीन का ट्रायल फिलहाल तीसरे और आखिरी चरण में है। 
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