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क्या आप जानते हैं कि आपके ऊपर है भगवान शिव का ऋ‍ण, ऐसे होगा चुकता

By Dabangdunia News Service | Publish Date: May 17 2021 12:04AM | Updated Date: May 17 2021 12:05AM
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मनुष्य जन्म लेता है तो उसकी मृत्यु तक कई तरह के ऋण, पाप, पुण्य उसका पीछा करते रहते हैं। हिन्दू शास्त्रों में कहा गया है कि तीन तरह के ऋण को चुकता कर देने से मनुष्य को बहुत से पापों और संकटों से छुटकारा मिल जाता है। कहीं कहीं चार तरह के ऋण बताए गए हैं। चौथा ब्रह्मा का ऋण होता है। 

ये तीन ऋण हैं:- 1. देव ऋण, 2. ऋषि ऋण और 3. पितृ ऋण। देव ऋण विष्णु का, ऋषि ऋण शिव का और पितृ ऋण पितरों का होता है।

इन तीन ऋणों को उतारना प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य है। यह जीवन और अगला जीवन सुधारना हो तो इन ऋणों के महत्व को समझना जरूरी है। मनुष्य पशुओं से इसलिए अलग है, क्योंकि उसके पास नैतिकता, धर्म और विज्ञान की समझ है। जो व्यक्ति इनको नहीं मानता वह पशुवत है। उक्त तीन ऋणों में से यहां प्रस्तुत है ऋषि ऋण के बारे में।

ऋषि ऋण : यह ऋण भगवान शंकर का है। वेद,, उपनिषद और गीता पढ़कर उसके ज्ञान को सभी में बांटने से ही यह ऋण चुकता हो सकता है। जो व्यक्ति ऐसा नहीं करता है उससे भगवान शिव और ऋषिगण सदा अप्रसन्न ही रहते हैं। इससे व्यक्ति का जीवन घोर संकट में घिरता जाता है या मृत्यु के बाद उसे किसी भी प्रकार की मदद नहीं मिलती।

खास उपाय : इस ऋण को चुकाने के लिए व्यक्ति को प्रतिमाह गीता का पाठ करना चाहिए। सत्संग में जाते रहना चाहिए। अच्छे आचरण को अपनाना चाहिए। शरीर, मन और घर को जितना हो सके साफ और स्वच्छ रखना चाहिए। सिर पर घी, भभूत या चंदन का तिलक लगाना चाहिए। पीपल, बड़ और तुलसी में जल अर्पित करना चाहिए। माता पिता का सम्मान करना चाहिए।

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